शनिवार, 4 सितंबर 2010

रविवार, 14 सितंबर 2008

भूमि हीनो का आंदोलन

डॉ.बाबा साहेब की

रविवार, 31 अगस्त 2008

शनिवार, 30 अगस्त 2008

स्थापना


डॉ। बाबा साहेब आम्बेडकर जी ने अपना पुरा जीवन दलितों- पीडितो शोषितों से होते अन्याय अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करने में अर्पण कर दिया.आजाद भारत के सविंधान की रचनामे उनके महत्वपूर्ण योगदान को हम

सब भली भातीं जानते हे.डॉ। बाबा साहेब आम्बेडकर अच्छी तरह से जानते थे की भले ही उन्होंने सविंधान में

दलितों- पीडितो शोषितों के लिए अनामत की व्यवस्था की हो पर जातिवादी कोमवादी ताकते कभीभी उन्हें अपने समान दरज्जा नही देंगे.इस लिए बाबा साहेबने धर्म के लिए बौद्ध धम्म और शिक्षा के लिए पीपल्स एज्युकेशन सोसा.की स्थापना की .इसी तरहसे भारत की ८५ प्रतिशत आबादी जिनकी हे ऐसे एस.सी.एस.टी.,औ.बी.सी.की जो मुख्य रूपसे समान जातिवादी कोमवादी समस्या का सामना कर रहे हे.ऐसे लोगोको संगठित कर एक राजनैतिक पार्टी का निर्माण करने का उनका संकल्प था.जिस का जिक्र उन्होंने अपने खुल्ले पत्र मेकिया था.वे उस पार्टी की नीवं रखने ही जा रहे थे .तब अचानक उनका महापरिनिवार्ण हो गया।

बाबा साहेब आम्बेडकरके इस सपनेको उनके साथी ,अनुयायीऔ ने पुरा करने और दलितोंपीडितो शोषितों की समस्याओ को हल कर उन्हें सन्मानजनक स्थान दिला कर.सता में भागीदार बनाने ०३ अक्टूम्बर १९५७ को

मान.रावबहादुर ऍन.शिवराज जी की अध्यक्षता में रिपब्लिकन पार्टी ओफ इंडिया की स्थापना की.